Lyrics
गली-गली में नाम रहल, लोग कहे “भइया”,
डर से झुकत रहे सब, बन गइल रहन सइयां
छोट उमिर में चढ़ गइल, गलत रास्ता के नशा,
ताकत के नाँव पर, बढ़ गइल झूठ के भाषा
हाथ में रोब, दिल में खालीपन,
ना सुकून मिले, ना मिले अपनापन
रात के नींद उड़े, दिन में चैन ना,
ई कइसन जिनगी, समझ में आए ना
(Chorus)
भाईगिरी छोड़s, सही राह पकड़s,
इज्जत कमाईल जाला, डर से ना बनs
सच के साथ चलs, दुनिया देखाई,
गलत के अंजाम आखिर सबके सिखाई
(Verse 2)
माँ के आँख में आँसू, बाबूजी के चुप्पी,
समझ में तब आइल, जिनगी में का हउवे सच्ची
दोस्त भी दूर भइल, नाम रह गइल बदनाम,
जे डर से झुकत रहे, उ सब बदल गइल काम
एक दिन ठान लिहनी, अब ना करीं गलत,
मेहनत के रस्ता ही असली ताकत
पसीना बहा के कमाईल रोटी,
उहे लागे मीठ, उहे सच्ची मोटी
(Chorus)
भाईगिरी छोड़s, सही राह पकड़s,
इज्जत कमाईल जाला, डर से ना बनs
सच के साथ चलs, दुनिया देखाई,
गलत के अंजाम आखिर सबके सिखाई
(Verse 3)
आज वही गली में, लोग करे सम्मान,
नाम अब डर से ना, मेहनत से पहचान
छोट-छोट सपना, अब होत पूरा,
सही रास्ता चल के, मिलल सुकून भरपूरा
जिनगी के सीख अब सबके बताईं,
गलत राह छोड़ के, आगे बढ़ जाईं
असल में “भइया” उहे होला यार,
जे साथ दे सच्चा, ना करे अत्याचार
(Bridge)
ताकत के मतलब ना डर फैलावल,
ताकत ह उहे—सही के निभावल
इज्जत, मेहनत, प्यार के राज,
एही में बसल असली समाज
(Final Chorus)
भाईगिरी छोड़s, सही राह पकड़s,
इज्जत से जीअs, बस एही असल लड़s
सच्चाई के जीत, हर बार होई,
गलत के अंधेरा, एक दिन खोई 🌅
अब गली से निकल के पहुँचल बजार,
जहाँ नेता लोग खेले बड़ा खेल अपार
वादा के पुल बनाके, तोड़े हर बार,
गरीब के सपना रह जाला अधूरा हर बार
कुर्सी खातिर बदले रंग, गिरगिट से तेज,
सच के आवाज दबा दे, झूठ करे मेज
पहिले जे डर फैलावत रहल हम,
आज समझ में आइल—ऊ खेल बा कम
(Chorus)
ना भाईगिरी, ना झूठ के राज,
सचाई से बदली समाज के आज
रजनीति में साफ होखे चाल,
तभी त मजबूत होई देश के हाल
(Verse 2)
नोट अउर वोट के खेल बड़ा गजब,
लोगन के बहकाके जीत जाले सब
जात-पात में बाँट के, करेला राज,
टूट जाला अपनापन, बिखर जाला समाज
हमहूं सोचनी—ई कइसन सिस्टम बा,
जहाँ सच बोले वाला सबसे कम बा
अब ठान लिहनी, बदली एह दौर,
सच के आवाज बनब, ना रही कमजोर
(Chorus)
ना भाईगिरी, ना झूठ के राज,
सचाई से बदली समाज के आज
रजनीति में साफ होखे चाल,
तभी त मजबूत होई देश के हाल
(Verse 3)
अब मंच पे खड़ा बानी, सच बोलत जोर से,
ना डर बा काहू के, ना बिकत मोर से
जनता के सेवा ही असली काम,
एही से मिलेला सच्चा नाम
युवा सबके जगावे के बा,
गलत के खिलाफ खड़ा होखे के बा
ना डर, ना लालच, बस सच्चाई,
एही से चमकी देश के परछाई
(Bridge)
कुर्सी ना, सेवा के सोच बढ़ाव,
नफरत छोड़ के, प्रेम जगाव
सही नेता उहे, जे साथ निभावे,
हर दुख-सुख में जनता के बचावे
(Final Chorus)
भाईगिरी छोड़s, अब सेवा में लगs,
देश खातिर कुछ नया रंग जगs
सच के राह पे आगे बढ़s,
तभी त जिनगी में असली जीत मिलs 🇮🇳
डर से झुकत रहे सब, बन गइल रहन सइयां
छोट उमिर में चढ़ गइल, गलत रास्ता के नशा,
ताकत के नाँव पर, बढ़ गइल झूठ के भाषा
हाथ में रोब, दिल में खालीपन,
ना सुकून मिले, ना मिले अपनापन
रात के नींद उड़े, दिन में चैन ना,
ई कइसन जिनगी, समझ में आए ना
(Chorus)
भाईगिरी छोड़s, सही राह पकड़s,
इज्जत कमाईल जाला, डर से ना बनs
सच के साथ चलs, दुनिया देखाई,
गलत के अंजाम आखिर सबके सिखाई
(Verse 2)
माँ के आँख में आँसू, बाबूजी के चुप्पी,
समझ में तब आइल, जिनगी में का हउवे सच्ची
दोस्त भी दूर भइल, नाम रह गइल बदनाम,
जे डर से झुकत रहे, उ सब बदल गइल काम
एक दिन ठान लिहनी, अब ना करीं गलत,
मेहनत के रस्ता ही असली ताकत
पसीना बहा के कमाईल रोटी,
उहे लागे मीठ, उहे सच्ची मोटी
(Chorus)
भाईगिरी छोड़s, सही राह पकड़s,
इज्जत कमाईल जाला, डर से ना बनs
सच के साथ चलs, दुनिया देखाई,
गलत के अंजाम आखिर सबके सिखाई
(Verse 3)
आज वही गली में, लोग करे सम्मान,
नाम अब डर से ना, मेहनत से पहचान
छोट-छोट सपना, अब होत पूरा,
सही रास्ता चल के, मिलल सुकून भरपूरा
जिनगी के सीख अब सबके बताईं,
गलत राह छोड़ के, आगे बढ़ जाईं
असल में “भइया” उहे होला यार,
जे साथ दे सच्चा, ना करे अत्याचार
(Bridge)
ताकत के मतलब ना डर फैलावल,
ताकत ह उहे—सही के निभावल
इज्जत, मेहनत, प्यार के राज,
एही में बसल असली समाज
(Final Chorus)
भाईगिरी छोड़s, सही राह पकड़s,
इज्जत से जीअs, बस एही असल लड़s
सच्चाई के जीत, हर बार होई,
गलत के अंधेरा, एक दिन खोई 🌅
अब गली से निकल के पहुँचल बजार,
जहाँ नेता लोग खेले बड़ा खेल अपार
वादा के पुल बनाके, तोड़े हर बार,
गरीब के सपना रह जाला अधूरा हर बार
कुर्सी खातिर बदले रंग, गिरगिट से तेज,
सच के आवाज दबा दे, झूठ करे मेज
पहिले जे डर फैलावत रहल हम,
आज समझ में आइल—ऊ खेल बा कम
(Chorus)
ना भाईगिरी, ना झूठ के राज,
सचाई से बदली समाज के आज
रजनीति में साफ होखे चाल,
तभी त मजबूत होई देश के हाल
(Verse 2)
नोट अउर वोट के खेल बड़ा गजब,
लोगन के बहकाके जीत जाले सब
जात-पात में बाँट के, करेला राज,
टूट जाला अपनापन, बिखर जाला समाज
हमहूं सोचनी—ई कइसन सिस्टम बा,
जहाँ सच बोले वाला सबसे कम बा
अब ठान लिहनी, बदली एह दौर,
सच के आवाज बनब, ना रही कमजोर
(Chorus)
ना भाईगिरी, ना झूठ के राज,
सचाई से बदली समाज के आज
रजनीति में साफ होखे चाल,
तभी त मजबूत होई देश के हाल
(Verse 3)
अब मंच पे खड़ा बानी, सच बोलत जोर से,
ना डर बा काहू के, ना बिकत मोर से
जनता के सेवा ही असली काम,
एही से मिलेला सच्चा नाम
युवा सबके जगावे के बा,
गलत के खिलाफ खड़ा होखे के बा
ना डर, ना लालच, बस सच्चाई,
एही से चमकी देश के परछाई
(Bridge)
कुर्सी ना, सेवा के सोच बढ़ाव,
नफरत छोड़ के, प्रेम जगाव
सही नेता उहे, जे साथ निभावे,
हर दुख-सुख में जनता के बचावे
(Final Chorus)
भाईगिरी छोड़s, अब सेवा में लगs,
देश खातिर कुछ नया रंग जगs
सच के राह पे आगे बढ़s,
तभी त जिनगी में असली जीत मिलs 🇮🇳